उत्तराखंड के चमोली जिले में फंसे सभी मजदूरों को और रेस्क्यू टीम ने बाहर निकाला

चमोली ग्लेशियर हादसा: तीन दिन बाद पूरा हुआ रेस्क्यू अभियान, 46 मजदूर सुरक्षित निकाले गए, 8 की मौत

चमोली/देहरादून। उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने के बाद शुरू किया गया मजदूरों का खोज एवं बचाव अभियान तीन दिन की लगातार मेहनत के बाद पूरा कर लिया गया। सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों ने युद्ध स्तर पर अभियान चलाते हुए बर्फ में फंसे मजदूरों को बाहर निकाला।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बचाव दलों ने कठिन मौसम और भारी बर्फबारी के बीच लगातार राहत कार्य जारी रखा। अभियान के दौरान कुल 46 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि 8 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की जा रही है।

बचाव अभियान में आधुनिक उपकरणों, स्निफर डॉग्स और विशेष प्रशिक्षण प्राप्त राहत कर्मियों की मदद ली गई। कई स्थानों पर कई फीट मोटी बर्फ हटाकर मजदूरों तक पहुंचना पड़ा। खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र के बावजूद राहत दलों ने लगातार अभियान जारी रखा, जिसके चलते अधिकांश मजदूरों को सुरक्षित बचाया जा सका।

राज्य सरकार ने हादसे की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को भविष्य में ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मृतकों के परिजनों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने और घायलों के समुचित उपचार की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए।

विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान ग्लेशियर और हिमस्खलन का खतरा अधिक रहता है। ऐसे क्षेत्रों में निर्माण कार्य करने वाली एजेंसियों को मौसम संबंधी चेतावनियों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करना चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सके।

चमोली ग्लेशियर हादसा उत्तराखंड के हालिया वर्षों की गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जा रहा है। राहत एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई और समन्वय के कारण बड़ी संख्या में मजदूरों की जान बचाई जा सकी।


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