फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन 2026 के आउटरीच सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी के लिए संतुलित, साझा और टिकाऊ आर्थिक विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विकास केवल जीडीपी और व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका वास्तविक लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने भारत के विकास मॉडल “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” का उल्लेख करते हुए बताया कि यही सोच भारत की वैश्विक नीतियों का भी आधार है। उन्होंने भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान अपनाए गए “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” के सिद्धांत को वैश्विक सहयोग का उदाहरण बताया।
पीएम मोदी ने भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, निवेश बढ़ाने और रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक संकटों और संघर्षों का सबसे अधिक असर ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ा है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इनके समर्थन के लिए आगे आना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीपीय देशों को जोड़ने वाली नई संपर्क परियोजनाओं पर भी विचार करने का आह्वान किया। साथ ही “IMPACT” नामक नई साझेदारी का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि इसमें जी-7 की पूंजी, भारत की प्रतिभा और ग्लोबल साउथ की भागीदारी को जोड़ा जा सकता है।
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