राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने MES प्रशिक्षु अधिकारियों से की मुलाकात, आत्मनिर्भर और हरित भारत के निर्माण का दिया संदेश

नई दिल्ली, 25 जून 2026। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में सेना इंजीनियरी सेवा (MES) के वर्ष 2023 और 2024 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए देश के रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

राष्ट्रपति ने कहा कि सेना इंजीनियरी सेवा देश के रक्षा अवसंरचना तंत्र की रीढ़ है। यह संगठन सामरिक महत्व के सैन्य प्रतिष्ठानों के निर्माण और रखरखाव के माध्यम से सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता को सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि MES अधिकारियों का कौशल, समर्पण और कड़ी मेहनत यह सुनिश्चित करती है कि सेना, नौसेना और वायुसेना के जवान अपने कर्तव्यों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।

राष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों से पेशेवर दृष्टिकोण, सत्यनिष्ठा, तकनीकी उत्कृष्टता और कर्तव्यनिष्ठा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने नवाचार और आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक परियोजना में उत्कृष्टता हासिल करने का प्रयास किया जाना चाहिए।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच स्वदेशी क्षमताओं का विकास रणनीतिक आवश्यकता बन गया है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्वदेशी रक्षा तकनीकों और मजबूत घरेलू औद्योगिक आधार की उपयोगिता स्पष्ट रूप से सामने आई है। उन्होंने MES द्वारा ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों के उपयोग और प्रोत्साहन की सराहना की।

राष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को भी समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने अधिकारियों से निर्माण और रखरखाव कार्यों में पर्यावरण-अनुकूल एवं टिकाऊ तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि MES के प्रयास केवल सुरक्षित भारत ही नहीं, बल्कि स्वच्छ, हरित और सतत भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि युवा अधिकारी अपने ज्ञान, कौशल और समर्पण के बल पर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और भारत को आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र बनाने में योगदान देंगे।

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