नई दिल्ली, 28 जुलाई 2026। लोकसभा में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की एक टिप्पणी को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बहस के दौरान उन्होंने सरकार के शिक्षा सुधार पैनल के एक सदस्य को “गोमूत्र विशेषज्ञ” कह दिया, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
प्रियंका गांधी का यह बयान आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी के संदर्भ में माना जा रहा है। उन्होंने सदन में आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा सुधार के नाम पर ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण समितियों में शामिल कर रही है जिनकी विशेषज्ञता पर सवाल उठते हैं। कांग्रेस ने इस टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा कि उसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अकादमिक गुणवत्ता पर चर्चा करना था।
वहीं भाजपा और सरकार समर्थक सदस्यों ने प्रियंका गांधी के बयान की कड़ी आलोचना की। सत्ता पक्ष ने कहा कि किसी प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और वैज्ञानिक संस्था के प्रमुख के बारे में इस प्रकार की टिप्पणी करना अनुचित है और इससे शैक्षणिक संस्थानों की गरिमा प्रभावित होती है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी की है।
उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य प्रतियोगी और सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर कड़ी रोक लगाना है। सरकार का दावा है कि यह विधेयक परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगा, जबकि विपक्ष इसके कुछ प्रावधानों पर सवाल उठा रहा है।
प्रियंका गांधी की टिप्पणी के बाद यह मुद्दा संसद से निकलकर राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया तक पहुंच गया है। दोनों पक्ष इस विवाद को लेकर एक-दूसरे पर लगातार निशाना साध रहे हैं, जिससे शिक्षा सुधार पर चल रही बहस राजनीतिक रंग लेती दिखाई दे रही है।
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