Department of Drinking Water and Sanitation (डीडीडब्ल्यूएस) ने जल जीवन मिशन 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर 8वें जिला कलेक्टर पेयजल संवाद का आयोजन किया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में देशभर के जिला कलेक्टरों, उपायुक्तों और राज्य मिशन निदेशकों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता डीडीडब्ल्यूएस के सचिव अशोक के.के. मीना ने की।
बैठक में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल से जल पहुंचाने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि अब तक देश के लगभग 81 प्रतिशत ग्रामीण घरों तक नल जल कनेक्शन पहुंच चुका है और मिशन को वर्ष 2028 तक बढ़ा दिया गया है।
बैठक के दौरान कई जिलों ने अपने नवाचार मॉडल प्रस्तुत किए। महाराष्ट्र के नागपुर जिले ने वर्षा जल संचयन और सौर ऊर्जा आधारित जल आपूर्ति मॉडल पेश किया, जिससे परियोजना लागत में भारी कमी आई। ओडिशा के कोरापुट ने पहाड़ी क्षेत्रों में गुरुत्वाकर्षण आधारित जल योजनाओं का उदाहरण दिया, जबकि केरल के कोल्लम जिले ने 24 घंटे शिकायत निवारण और ऑनलाइन निगरानी प्रणाली की जानकारी साझा की।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले ने नदियों के पुनर्जीवन और सामुदायिक जल संरक्षण अभियान की सफलता बताई। वहीं राजस्थान के पाली और झारखंड के धनबाद ने वर्षा जल संचयन, तालाब पुनर्जीवन और सूखे बोरवेलों के पुनरुद्धार जैसे मॉडल प्रस्तुत किए।
बैठक में जल गुणवत्ता निगरानी, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि ग्राम पंचायतों की भागीदारी और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करना मिशन की सफलता की कुंजी होगी।
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