ब्लैक होल के जेट्स पर बड़ा खुलासा: वैज्ञानिकों ने एक्स्ट्रागैलेक्टिक जेट्स की संरचना का रहस्य सुलझाया

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने Black Hole के आसपास बनने वाले एक्स्ट्रागैलेक्टिक जेट्स की संरचना को लेकर महत्वपूर्ण खोज की है। इस शोध से यह समझने में मदद मिली है कि ये जेट्स अलग-अलग रूपों में क्यों दिखाई देते हैं और इनके पीछे कौन-से भौतिक कारण जिम्मेदार हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, आकाशगंगाओं के केंद्र में मौजूद अतिविशाल ब्लैक होल केवल पदार्थ को निगलते ही नहीं, बल्कि अत्यधिक ऊर्जा के साथ प्लाज्मा की तेज धाराएं (जेट्स) अंतरिक्ष में छोड़ते हैं। ये जेट्स हजारों प्रकाश-वर्ष तक फैल सकते हैं और रेडियो तरंगों से लेकर गामा किरणों तक ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं।

पहले किए गए अध्ययनों में इन्हें दो श्रेणियों—FR-I और FR-II—में बांटा गया था, लेकिन इनके स्वरूप में अंतर का कारण स्पष्ट नहीं था। अब नए शोध में उन्नत कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए यह सामने आया है कि जेट्स के अंदर मौजूद प्लाज्मा की संरचना और “किंक अस्थिरता” (Kink Instability) इनके आकार और व्यवहार को निर्धारित करती है।

शोध में पाया गया कि यदि जेट्स में पॉज़िट्रॉन (लेप्टन) अधिक होते हैं, तो वे तेजी से फैलकर कमजोर हो जाते हैं और FR-I जैसे दिखाई देते हैं। वहीं इलेक्ट्रॉन-प्रोटॉन वाले जेट्स अधिक स्थिर रहते हैं और FR-II जैसी संरचना बना सकते हैं।

यह अध्ययन Aryabhatta Research Institute of Observational Sciences सहित कई संस्थानों के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है और The Astrophysical Journal में प्रकाशित हुआ है।

यह खोज ब्रह्मांड में ऊर्जा प्रवाह, आकाशगंगाओं के विकास और ब्लैक होल की प्रकृति को समझने में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

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