गुरु पूर्णिमा 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषित, गुरुजनों के आदर्शों को जीवन में अपनाने का किया आह्वान
नई दिल्ली। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए गुरु की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु केवल शिक्षा देने वाले नहीं होते, बल्कि वे अपने शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा, उत्तम विचार और श्रेष्ठ संस्कारों का संचार कर उनके व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा किया—
“प्रेरकः सूचकश्चैव वाचको दर्शकस्तथा।
शिक्षकः बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः॥”
उन्होंने बताया कि इस सुभाषित का अर्थ है कि जो व्यक्ति प्रेरणा देता है, सही दिशा दिखाता है, ज्ञान प्रदान करता है, सत्य का बोध कराता है, शिक्षा देता है और जीवन के सही मार्ग पर चलना सिखाता है, वही गुरु के छह स्वरूपों का प्रतिनिधित्व करता है।
प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर लिखा कि गुरु अपने शिष्यों को केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि उनमें सकारात्मक सोच और सुसंस्कार भी विकसित करते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने गुरुजनों के आदर्शों को जीवन का आधार बनाएं और उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज व राष्ट्र के निर्माण में योगदान दें।
गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें गुरु और शिष्य के पवित्र संबंध का सम्मान किया जाता है। इस दिन विद्यार्थी अपने शिक्षकों और गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। प्रधानमंत्री का यह संदेश शिक्षा, संस्कार और भारतीय परंपरा के महत्व को पुनः रेखांकित करता है तथा समाज को गुरुजनों के प्रति सम्मान और श्रद्धा बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
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