भारत का बड़ा मिशन: 2030 तक हेपेटाइटिस मुक्त देश बनाने की तैयारी, जानिए सरकार की नई रणनीति और बचाव के उपाय

 

भारत 2030 तक हेपेटाइटिस उन्मूलन के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है

नई दिल्ली। भारत सरकार वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है। इस दिशा में नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम (NVHCP) के माध्यम से देशभर में मुफ्त जांच, दवाएं और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल (SDGs) के अनुरूप संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य संक्रमण की रोकथाम, समय पर पहचान और प्रभावी इलाज सुनिश्चित करना है।

क्या है हेपेटाइटिस और क्यों है खतरनाक?

हेपेटाइटिस लिवर (यकृत) में होने वाली सूजन है, जो मुख्य रूप से वायरल संक्रमण के कारण होती है। इसके अलावा शराब, जहरीले पदार्थ, कुछ दवाओं और ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण भी यह रोग हो सकता है। हेपेटाइटिस वायरस के पांच प्रमुख प्रकार A, B, C, D और E हैं। इनमें हेपेटाइटिस बी और सी सबसे अधिक गंभीर माने जाते हैं, क्योंकि लंबे समय तक संक्रमण रहने पर यह लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

कैसे फैलता है संक्रमण और क्या हैं बचाव के उपाय?

हेपेटाइटिस A और E मुख्य रूप से दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलते हैं। साफ पानी पीना, स्वच्छता बनाए रखना और व्यक्तिगत साफ-सफाई इसका सबसे प्रभावी बचाव है।

वहीं, हेपेटाइटिस B संक्रमित खून, शरीर के तरल पदार्थों और जन्म के समय मां से बच्चे में फैल सकता है। इससे बचाव के लिए हेपेटाइटिस-बी का टीकाकरण सबसे प्रभावी उपाय है।

हेपेटाइटिस C असुरक्षित इंजेक्शन, संक्रमित सुई और संक्रमित रक्त के संपर्क से फैलता है। फिलहाल इसकी कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, लेकिन आधुनिक एंटीवायरल दवाओं से अधिकांश मरीज 12 से 24 सप्ताह में पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं।

मुफ्त जांच और इलाज की सुविधा

सरकार ने वर्ष 2018 से देशभर में हेपेटाइटिस बी और सी की मुफ्त जांच और इलाज की सुविधा शुरू की है। अब यह सेवाएं केवल जिला अस्पतालों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक भी पहुंचाई जा रही हैं। डिजिटल NVHCP-MIS पोर्टल के माध्यम से मरीजों का रिकॉर्ड और उपचार पूरी तरह पेपरलेस तरीके से संचालित किया जा रहा है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जोड़ा गया अभियान

हेपेटाइटिस नियंत्रण अभियान को यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP), राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP), ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेवाओं तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जोड़ा गया है। इससे गर्भवती महिलाओं की जांच, नवजात शिशुओं का टीकाकरण और उच्च जोखिम वाले लोगों की नियमित स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जा रही है।

सरकार ने आम लोगों की सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-11-6666 भी उपलब्ध कराई है, जहां हेपेटाइटिस से जुड़े संक्रमण, जांच, इलाज और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

भारत की 2030 तक की रणनीति

स्वास्थ्य मंत्रालय का लक्ष्य जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच, मुफ्त उपचार और सार्वभौमिक टीकाकरण के माध्यम से 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को नियंत्रित करना है। सरकार का मानना है कि यदि समय रहते जांच और उपचार कराया जाए तो हेपेटाइटिस से होने वाली गंभीर जटिलताओं और मृत्यु के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।


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