प्रधानमंत्री मोदी ने प्रकृति संरक्षण पर साझा किया संस्कृत सुभाषित, कहा- प्रकृति के सम्मान में ही मानवता का कल्याण

 

प्रकृति के संरक्षण और सम्मान में ही मानवता का कल्याण: प्रधानमंत्री मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषित

नई दिल्ली, 28 जुलाई 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रकृति के संरक्षण और उसके सम्मान को मानवता के कल्याण का आधार बताते हुए एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा किया। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन संस्कृति और परंपराएं सदियों से प्रकृति के साथ संतुलित एवं सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने का संदेश देती रही हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए लिखा कि "प्रकृति के संरक्षण और सम्मान में ही मानवता का कल्याण निहित है। हमारी परंपरा भी हमें इसी धर्मसम्मत आचरण की प्रेरणा देती है।"

उन्होंने जो सुभाषित साझा किया, उसमें दिशाओं के रक्षक देवताओं, इंद्र, छहों ऋतुओं, सभी महीनों, वर्षों, रात्रियों, दिनों और शुभ मुहूर्तों से मानव जीवन के मंगल और समृद्धि की कामना की गई है। साथ ही वेद, स्मृतियों और धर्म से सभी की रक्षा का संदेश दिया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सुभाषित हमें सिखाता है कि प्रकृति और धर्म के साथ सामंजस्य स्थापित करके जीया गया जीवन ही सुख, सुरक्षा और समृद्धि का आधार बनता है। भारतीय संस्कृति सदैव पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सम्मान और पृथ्वी के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देती रही है।

उन्होंने अपने संदेश के माध्यम से लोगों से प्रकृति के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का आह्वान भी किया। प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास जैसे विषय वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया यह संदेश भारतीय संस्कृति की उस परंपरा को भी रेखांकित करता है, जिसमें प्रकृति को पूजनीय माना गया है और मानव जीवन को उसके साथ संतुलित रखने पर विशेष बल दिया गया है।



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