राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बुनकरों को किया सम्मानित, नई तकनीक के उचित उपयोग पर दिया जोर
नई दिल्ली, 7 अगस्त 2026। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में शामिल हुईं। राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र, नई दिल्ली में आयोजित समारोह के दौरान उन्होंने संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार 2025 प्रदान किए। इस अवसर पर भारत की समृद्ध और विविध हथकरघा बुनाई परंपराओं के सम्मान में चार स्मारक डाक टिकट भी जारी किए गए।
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि हथकरघा सदियों से भारत की सभ्यता और विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा रहा है। यह देश की असाधारण विविधता को दर्शाने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट परंपराओं को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि हथकरघा क्षेत्र रोजगार, महिला सशक्तीकरण, कला-संस्कृति और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देता है। इसका संबंध भारत के स्वतंत्रता संग्राम और आत्मनिर्भरता की भावना से भी रहा है।
राष्ट्रपति ने बताया कि 7 अगस्त 1905 को स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। बंगाल विभाजन के विरोध में शुरू किए गए इस आंदोलन का उद्देश्य स्वदेशी वस्तुओं और उद्योगों को बढ़ावा देना था। इसमें देश के हथकरघा बुनकरों को प्रोत्साहन देना भी प्रमुख उद्देश्य था। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में भारत सरकार वर्ष 2015 से हर साल 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाती है।
हथकरघा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का हथकरघा क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख मानव-केंद्रित उदाहरण बनने की क्षमता रखता है। महत्वपूर्ण हथकरघा क्लस्टरों को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण विधियों से जोड़ा जा रहा है। बुनकरों की आय बढ़ाने के लिए भी विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से भारतीय हथकरघा क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय छवि मजबूत हो रही है और यह एक प्रमाणित सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि तकनीक और नए डिजाइन के साथ युवा उद्यमी इस क्षेत्र से जुड़ रहे हैं। युवा उद्यमी, डिजाइनर और स्टार्टअप पारंपरिक शिल्प को आधुनिक ट्रेंड्स, ब्रांड्स और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़कर नए अवसर पैदा कर सकते हैं।
ई-कॉमर्स से वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर जोर
राष्ट्रपति ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र के सतत विकास के लिए नई प्रौद्योगिकियों का उचित उपयोग आवश्यक है। आधुनिक डिजिटल समाधानों के जरिए बाजार तक पहुंच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भारतीय हथकरघा उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों और बुनकर सेवा केंद्रों के अंतर्गत संचालित डिजाइन संसाधन केंद्रों की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि ये केंद्र युवाओं को हथकरघा क्षेत्र से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि हथकरघा क्षेत्र देश के समावेशी विकास और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बनेगा।
संत कबीर और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार
संत कबीर हथकरघा पुरस्कार हथकरघा बुनकरों को दिया जाने वाला देश का सर्वोच्च सम्मान है। यह पुरस्कार उत्कृष्ट कारीगरी, हथकरघा के प्रति समर्पित जीवन तथा भारत की बुनाई परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन में निरंतर योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।
वहीं, राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार ऐसे बुनकरों और अन्य हितधारकों को दिया जाता है, जिन्होंने पारंपरिक कौशल के संरक्षण के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए रचनात्मकता, गुणवत्ता, नवीनता और उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया है।
#NationalHandloomDay #HandloomIndia #DraupadiMurmu #HandloomAwards #MakeInIndia
