तीव्र भूचुंबकीय तूफान ने अंतरिक्ष मौसम पर सूक्ष्म सौर सीएमई के प्रभाव को उजागर किया

नई दिल्ली/विज्ञान डेस्क: खगोलविदों ने मार्च 2023 में सूर्य से पृथ्वी तक पहुँचे एक कोरोनल मास इजेक्शन (CME) का विस्तृत अध्ययन किया है, जिससे अंतरिक्ष मौसम (स्पेस वेदर) से जुड़े कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ है कि एक अपेक्षाकृत कमजोर या सूक्ष्म सौर सीएमई भी पृथ्वी पर तीव्र भूचुंबकीय तूफान (Geomagnetic Storm) उत्पन्न कर सकता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह सीएमई सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र में मौजूद छिद्रों, जिन्हें कोरोनल होल कहा जाता है, से होकर गुजरा। इस दौरान तेज सौर पवन धाराओं का रिसाव हुआ, जिसने इस सीएमई के प्रभाव को और अधिक शक्तिशाली बना दिया। यही कारण रहा कि आकार में छोटा होने के बावजूद इस सौर घटना ने पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र पर गंभीर प्रभाव डाला।

कोरोनल मास इजेक्शन (CME) सूर्य के वायुमंडल से प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्रों का अत्यंत शक्तिशाली निष्कासन होता है। जब ये पृथ्वी की ओर बढ़ते हैं, तो उपग्रहों, जीपीएस, रेडियो संचार प्रणालियों और बिजली ग्रिडों में व्यवधान पैदा कर सकते हैं।

अध्ययन में यह भी बताया गया है कि लगभग 10 प्रतिशत तीव्र भूचुंबकीय तूफान ऐसे होते हैं, जिनका संबंध सूर्य की सतह पर दिखाई देने वाले किसी बड़े विस्फोट से नहीं होता। ये तथाकथित “गुप्त कोरोनल मास इजेक्शन” (Stealth CME) होते हैं, जिन्हें वर्तमान तकनीकी सीमाओं के कारण आसानी से पहचाना नहीं जा सकता।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि सूर्य पर किसी स्पष्ट विस्फोट के बिना भी पृथ्वी पर गंभीर अंतरिक्ष मौसम प्रभाव दिखाई दें, तो इन गुप्त सीएमई की भूमिका को समझना बेहद जरूरी है। इससे भविष्य में अंतरिक्ष मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाने और संभावित तकनीकी खतरों से बचाव में मदद मिल सकती है।

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