आज स्वामी विवेकानंद की जयंती के पावन दिन चांसलर मर्ज का भारत में स्वागत करना मेरे लिए विशेष प्रसन्नता का विषय है। यह एक सुखद संयोग है कि स्वामी विवेकानंद ने भारत और जर्मनी के बीच दर्शन, ज्ञान और आत्मा के सेतु का कार्य किया था। आज चांसलर की यह यात्रा उसी सेतु को नई ऊर्जा, नया विश्वास और विस्तार प्रदान कर रही है। चांसलर की यह यात्रा न सिर्फ भारत बल्कि एशिया की पहली यात्रा है, जो इस बात का सशक्त प्रमाण है कि वे भारत के साथ संबंधों को कितना गहरा महत्व देते हैं।
भारत जर्मनी के साथ अपनी मित्रता और साझेदारी को और सुदृढ़ करने के लिये पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। पिछले वर्ष हमने अपनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे किये और इस वर्ष हम अपने राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष भी मना रहे हैं। ये उपलब्धियाँ हमारी साझा महत्वाकांक्षा, परस्पर विश्वास और सहयोग के प्रतीक हैं।
140 करोड़ भारतवासियों की ओर से मैं एक बार फिर से चांसलर का भारत में हार्दिक स्वागत करता हूँ। मुझे विश्वास है कि आज की चर्चा भारत-जर्मनी साझेदारी को नई ऊर्जा और स्पष्ट दिशा देगी। चांसलर मर्ज को उनके भारत के प्रति गहरे मित्रता के लिए मैं हृदय से धन्यवाद देता हूँ।
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