भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्ञान आधारित संसाधनों को मापने की नई पहल, सरकार ने मांगे सुझाव

Ministry of Statistics and Programme Implementation (MoSPI) ने भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्ञान और मूर्त संसाधनों के योगदान को मापने के लिए नई रूपरेखा तैयार करने की पहल शुरू की है। सरकार ने इस विषय पर तैयार शोधपत्र को सार्वजनिक करते हुए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, उद्योग संगठनों और आम जनता से सुझाव मांगे हैं।

सरकार का मानना है कि तेजी से बदलती तकनीक, डिजिटल अर्थव्यवस्था, नवाचार और कौशल आधारित कार्यप्रणाली के दौर में ज्ञान आधारित संसाधनों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह अध्ययन तैयार किया गया है। इस पहल के लिए तकनीकी सलाहकार समूह (TAG) का गठन भी किया गया था, जिसकी अध्यक्षता डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ने की।

शोधपत्र में ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था, अनुसंधान एवं विकास, बौद्धिक संपदा अधिकार, डिजिटल इकोनॉमी और पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणाली जैसे विषयों को शामिल किया गया है। इसके अलावा भारतीय पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और आर्थिक योगदान का भी विश्लेषण किया गया है।

सरकार ने बताया कि इस रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य सचिव रतन पी. वाटल की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है। यह समिति एक व्यावहारिक नीति पत्र तैयार करेगी।

इच्छुक लोग 15 जून 2026 तक अपने सुझाव और टिप्पणियां मंत्रालय को ईमेल के माध्यम से भेज सकते हैं। यह पहल भारत की ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और भविष्य की नीतियों को बेहतर दिशा देने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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