जिनेवा में आयोजित 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री Jagat Prakash Nadda ने “फेफड़ों की जांच पर मंत्रिस्तरीय दृष्टिकोण” विषय पर आयोजित स्टॉप टीबी पार्टनरशिप कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत की टीबी उन्मूलन रणनीति को वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि समय पर स्क्रीनिंग, शीघ्र निदान और स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच एक मजबूत एवं जन-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणाली की नींव है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम और ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान के तहत भारत ने दुनिया के सबसे बड़े स्क्रीनिंग एवं प्रारंभिक पहचान अभियानों में से एक को सफलतापूर्वक संचालित किया है। देशभर में घर-घर जागरूकता अभियान, मोबाइल स्क्रीनिंग टीम, सामुदायिक स्वास्थ्य अभियान और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष जांच अभियान चलाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत ने आधुनिक तकनीक के जरिए टीबी जांच प्रणाली को और मजबूत किया है। दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए आणविक परीक्षण प्लेटफॉर्म, डिजिटल चेस्ट एक्स-रे, एआई आधारित उपकरण, हैंडहेल्ड स्क्रीनिंग डिवाइस और विकेंद्रीकृत परीक्षण व्यवस्था को तेजी से लागू किया जा रहा है।
श्री नड्डा ने “टीबी मुक्त भारत ऐप” का भी उल्लेख किया, जिसमें “खुशी” नामक एआई-सक्षम बहुभाषी चैटबॉट शामिल है। यह ऐप लोगों को टीबी के लक्षण, उपचार, अधिकारों और नजदीकी जांच केंद्रों की जानकारी रियल टाइम में उपलब्ध कराता है।
उन्होंने कहा कि भारत केवल रोग नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली, बेहतर पोषण, स्वच्छ वातावरण और सामाजिक सहयोग के माध्यम से टीबी उन्मूलन की दिशा में कार्य कर रहा है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने फेफड़ों के स्वास्थ्य और टीबी उन्मूलन के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाने की अपील की।
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