प्रयागराज में Rajnath Singh का बड़ा बयान: भविष्य के युद्धों में तकनीक और अनुसंधान होंगे निर्णायक

प्रयागराज: रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने सोमवार को प्रयागराज में आयोजित तीन दिवसीय ‘नॉर्थ टेक संगोष्ठी’ के उद्घाटन सत्र में कहा कि आज के तकनीकी युग में भविष्य के युद्धों के लिए तैयार रहने हेतु अनुसंधान और अप्रत्याशित नवाचार बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र तकनीकी क्रांति को सबसे तेजी से अपनाएगा, वही आने वाले समय में युद्धक्षेत्र में निर्णायक बढ़त हासिल करेगा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। रूस-यूक्रेन जैसे संघर्षों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि पारंपरिक हथियारों से आगे बढ़कर अब ड्रोन, सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों का उपयोग बढ़ गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि रोजमर्रा की वस्तुएं भी अब घातक हथियारों में बदल सकती हैं, इसलिए भारत को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा।
Defence Research and Development Organisation (DRDO) की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि अब तक 2,200 से अधिक तकनीकों को उद्योगों को हस्तांतरित किया जा चुका है। साथ ही, रक्षा अनुसंधान बजट का 25% हिस्सा स्टार्टअप्स, उद्योग और शिक्षा जगत को दिया जा रहा है, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिल रहा है।

उन्होंने निर्देशित ऊर्जा, हाइपरसोनिक हथियार, क्वांटम तकनीक, एआई और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम करने पर जोर दिया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे भारत की तकनीकी क्षमता और सैन्य तैयारी का उदाहरण बताया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपये और निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
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