स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा, 10 प्रौद्योगिकियों को मिली ₹35.72 करोड़ की सहायता
नई दिल्ली: भारत में स्वदेशी तकनीक और विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा देने की दिशा में भारी उद्योग मंत्रालय की इंडस्ट्री एक्सीलेटर परियोजना का महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है। नई दिल्ली में आयोजित नविज्ञान 2026 कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने परियोजना की इम्पैक्ट रिपोर्ट जारी की।
परियोजना के तहत 10 प्रौद्योगिकियों को कुल ₹35.72 करोड़ की अनुदान सहायता दी गई। इसका उद्देश्य इन तकनीकों को टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL)-3 से TRL-9 तक आगे बढ़ाने में मदद करना था। इस पहल में इलेक्ट्रिक पावरट्रेन, हाई-वोल्टेज मोटर कंट्रोल और ऊर्जा भंडारण जैसी तकनीकों को शामिल किया गया।
वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर जोर
कार्यक्रम में एच. डी. कुमारस्वामी ने कहा कि भारत को केवल आधुनिक तकनीकों के बड़े बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि देश में तकनीक विकसित करने, उनका विनिर्माण करने और उन्हें वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की क्षमता भी मजबूत करनी होगी।
उन्होंने आत्मनिर्भरता को केवल आयात कम करने तक सीमित न रखते हुए भारतीय बौद्धिक संपदा, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर जोर दिया।
भारी उद्योग मंत्रालय की पूंजीगत वस्तु क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की योजना के दूसरे चरण का कुल वित्तीय परिव्यय ₹1,207 करोड़ है। इसके तहत अब तक 33 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
मंत्री ने सरकार, उद्योग, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षण संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को मजबूत करने की जरूरत बताई। कार्यक्रम में परियोजना से जुड़े सदस्यों को सम्मानित किया गया और स्टार्टअप प्रदर्शनी का भी दौरा किया गया।
