NEET-UG कंप्यूटर आधारित परीक्षा होगी? NTA में सुधार के लिए संसदीय समिति की 382वीं रिपोर्ट में बड़ी सिफारिशें
नई दिल्ली। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार और उसे मजबूत बनाने के लिए शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों से संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 382वीं रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं। 9 अक्टूबर 2026 को प्रस्तुत इस रिपोर्ट में NEET-UG को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में बदलने, परीक्षा में पारदर्शिता बढ़ाने, पेपर लीक रोकने, कोचिंग व्यवस्था में सुधार और छात्रों की शिकायतों के समाधान जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया है।
राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली समिति ने परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, जवाबदेह और छात्र-केंद्रित बनाने के लिए संस्थागत एवं तकनीकी सुधारों की जरूरत बताई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के साथ छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक और आर्थिक दबाव को कम करना आवश्यक है।
NEET-UG को कंप्यूटर आधारित परीक्षा बनाने की सिफारिश
समिति ने NEET-UG को चरणबद्ध तरीके से पेन-पेपर परीक्षा से कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने की सिफारिश की है। हालांकि, इसके लिए पर्याप्त सरकारी परीक्षा केंद्र, तकनीकी सुविधाएं और निष्पक्ष मूल्यांकन व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में 1,000 सुरक्षित सरकारी कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्र स्थापित करने की योजना को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे शहरों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए परीक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
समिति ने प्रत्येक जिले में कम से कम एक परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराने, विद्यार्थियों को मॉक टेस्ट का अवसर देने और जरूरत पड़ने पर संक्रमणकालीन अवधि में हाइब्रिड परीक्षा मॉडल अपनाने का सुझाव दिया है।
बहु-सत्रीय कंप्यूटर आधारित परीक्षा में प्रश्नों की कठिनाई के अंतर को दूर करने के लिए पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से ऑडिट की गई अंकों के समानीकरण की व्यवस्था भी विकसित करने की सिफारिश की गई है।
पेपर लीक रोकने के लिए बड़ा प्रश्न बैंक बनाने पर जोर
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए NTA को बड़े, विविध और लगातार अपडेट होने वाले प्रश्न बैंक तैयार करने चाहिए। प्रश्नों के चयन के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग किया जा सकता है, ताकि अंतिम प्रश्नपत्र परीक्षा के समय के करीब तैयार हो सके। समिति ने IIT, AIIMS और IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों की सहायता लेने तथा प्रश्न तैयार करने और अनुवाद करने वाले विशेषज्ञों की पृष्ठभूमि की जांच करने का सुझाव दिया है। हितों के टकराव से बचने के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है।
NTA में 41 प्रतिशत पद रिक्त होने पर चिंता
समिति ने NTA में कर्मचारियों की कमी पर चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी में 39 स्वीकृत पदों में से 23 पर अधिकारी तैनात थे, जबकि 16 पद रिक्त थे। यह स्वीकृत पदों का लगभग 41 प्रतिशत है। समिति ने सभी स्वीकृत पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज करने की सिफारिश की है। साथ ही, साइकोमेट्रिक्स, परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा एनालिटिक्स और परीक्षा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में स्थायी विशेषज्ञ कर्मचारियों की नियुक्ति पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए लंबे अनुभव और विशेष विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। इसलिए NTA को केवल प्रतिनियुक्ति पर निर्भर रहने के बजाय अपना समर्पित पेशेवर कैडर विकसित करना चाहिए।
परीक्षा केंद्रों और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत
समिति ने कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं में साइबर सुरक्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। रिपोर्ट में NTA के भीतर एक मजबूत आंतरिक साइबर सुरक्षा टीम बनाने की सिफारिश की गई है, जो सुरक्षित परीक्षा सॉफ्टवेयर विकसित करने और हैकिंग के खतरों से निपटने में सक्षम हो। कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली में रिमोट एक्सेस, स्क्रीन रिकॉर्डिंग और वर्चुअल मशीनों के अनुचित इस्तेमाल को रोकने वाले सुरक्षा उपायों पर भी जोर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, असामान्य उत्तर-पैटर्न की पहचान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषणात्मक उपकरण अपनाने की सिफारिश की गई है। समिति ने परीक्षा केंद्रों के संचालन में निजी ठेकेदारों पर निर्भरता कम करने और सरकारी स्वामित्व वाले परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाने का भी सुझाव दिया है।
परीक्षा में देरी से पहुंचने वाले छात्रों के लिए राहत का सुझाव
रिपोर्ट में परीक्षा केंद्र पर कुछ मिनट देर से पहुंचने वाले अभ्यर्थियों के मामले को भी उठाया गया है। समिति का सुझाव है कि उचित कारणों से देर से पहुंचने वाले छात्रों के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिसमें वे देरी का कारण दर्ज कराकर और आवश्यक वचन-पत्र पर हस्ताक्षर करके परीक्षा में शामिल हो सकें।
ऐसे अभ्यर्थियों को केवल बचा हुआ समय देने की सिफारिश की गई है। अतिरिक्त समय देने का सुझाव नहीं दिया गया है। समिति ने परीक्षा के दौरान सत्यापन और हस्ताक्षर जैसी औपचारिकताओं के कारण छात्रों का ध्यान भटकने से रोकने के लिए इन कार्यों के लिए परीक्षा की निर्धारित अवधि से अलग 15 मिनट का समय रखने की सिफारिश भी की है।
परीक्षा के दिन रैली और जुलूस पर रोक लगाने का सुझाव
समिति ने कहा है कि परीक्षा के दिन सार्वजनिक रैलियों, जुलूसों और बड़ी सभाओं के कारण अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है।
इसलिए रिपोर्ट में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में आवश्यक संशोधन कर जिला प्रशासन को परीक्षा के दिनों में ऐसी सार्वजनिक सभाओं की अनुमति नहीं देने का प्रावधान करने की सिफारिश की गई है। साथ ही, यातायात और कानून-व्यवस्था के लिए पहले से पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
यह एक संसदीय समिति की सिफारिश है; इसे लागू नियम या वर्तमान में प्रभावी प्रतिबंध नहीं माना जाना चाहिए।
NEET में क्वालिफाइंग कटऑफ की समीक्षा की सिफारिश
समिति ने NEET-UG में उत्तीर्ण घोषित किए जाने वाले अभ्यर्थियों की संख्या और उपलब्ध मेडिकल सीटों के बीच बड़े अंतर पर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस स्थिति से लाखों विद्यार्थियों पर अनावश्यक मानसिक दबाव पड़ सकता है। समिति ने NTA और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को क्वालिफाइंग परसेंटाइल और कटऑफ निर्धारित करने की मौजूदा व्यवस्था की साल-दर-साल, आंकड़ों पर आधारित समीक्षा करने की सिफारिश की है। उद्देश्य योग्यता से समझौता किए बिना उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की संख्या को उपलब्ध सीटों के अनुरूप संतुलित करना है। इसके अतिरिक्त, समिति ने NEET-UG सहित बड़ी परीक्षाओं में दो-स्तरीय परीक्षा प्रणाली की व्यवहार्यता पर विचार करने का सुझाव दिया है। इसमें सामान्य प्रारंभिक परीक्षा के बाद अलग-अलग पाठ्यक्रमों के लिए मुख्य परीक्षा का विकल्प शामिल हो सकता है। यह अभी एक प्रस्तावित सुझाव है, लागू परीक्षा पैटर्न में बदलाव की घोषणा नहीं।
कोचिंग उद्योग और स्कूल पाठ्यक्रम पर जोर
समिति ने चिंता जताई है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में निजी कोचिंग संस्थानों की भूमिका बढ़ने से स्कूली शिक्षा का महत्व प्रभावित हो सकता है। महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाने वाले विद्यार्थियों को इससे नुकसान होने की आशंका भी रिपोर्ट में व्यक्त की गई है। समिति ने NEET-UG, JEE Main और CUET के प्रश्नपत्रों को आधिकारिक स्कूली पाठ्यक्रम और वैचारिक समझ पर आधारित बनाने के लिए स्पष्ट मानक निर्धारित करने की सिफारिश की है।
कोचिंग संस्थानों के लिए शुल्क पारदर्शिता, सुरक्षा मानकों और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त नियामक ढांचा विकसित करने का सुझाव भी दिया गया है।
छात्रों को मिलेगा शिकायत और मानसिक स्वास्थ्य सहायता का प्रस्ताव
रिपोर्ट में परीक्षा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें प्रमुख हैं:
* छात्रों के लिए निःशुल्क और सुलभ मानसिक स्वास्थ्य परामर्श हेल्पलाइन।
* परीक्षा से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण के लिए समय-सीमा।
* प्रशासनिक कारणों से परीक्षा रद्द होने पर प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए वित्तीय मुआवजे की व्यवस्था पर विचार।
* दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए सुलभ परीक्षा केंद्र, आवश्यक लेखक, क्षतिपूर्ति समय और डिजिटल सुविधाएं।
* परीक्षा सुरक्षा प्रोटोकॉल का ऑडिट करने और शिकायतों की जांच के लिए NTA से स्वतंत्र तंत्र।
* परीक्षा परिणामों में अधिक पारदर्शिता और राज्यवार तथा अन्य श्रेणियों के आधार पर सफलता के आंकड़ों का विश्लेषण।
समिति ने NTA को छात्रों और अभिभावकों के साथ संवाद बढ़ाने तथा शिकायतों के लिए सुरक्षित माध्यम उपलब्ध कराने की भी सिफारिश की है।
पेपर लीक के मामलों का सार्वजनिक रिकॉर्ड तैयार करने का सुझाव
समिति ने परीक्षा संबंधी अनियमितताओं, दर्ज एफआईआर और जांच की स्थिति से जुड़े सार्वजनिक आंकड़ों की उपलब्धता पर चिंता जताई है। रिपोर्ट में दर्ज है कि उच्चतर शिक्षा विभाग ने समिति को बताया कि 2017 में NTA के गठन से 2025 तक उसकी ओर से आयोजित परीक्षाओं में पेपर लीक की कोई घटना नहीं हुई। समिति ने यह भी दर्ज किया कि उसके कुछ सदस्यों की राय इस कथन से अलग थी।
इसलिए समिति ने NTA, उच्चतर शिक्षा विभाग और अन्य संबंधित सरकारी एजेंसियों को परीक्षा संबंधी घटनाओं और जांच की स्थिति पर सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करने की सिफारिश की है। इसके अलावा, जिन परीक्षा सेवा प्रदाताओं को किसी सरकारी संस्था ने ब्लैकलिस्ट किया है, उनका राष्ट्रीय रजिस्टर तैयार करके सार्वजनिक रूप से ऑनलाइन उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया है।
NTA की भूमिका और जवाबदेही में बदलाव का सुझाव
समिति ने सिफारिश की है कि NTA को प्राथमिक रूप से उच्च शिक्षा संस्थानों की प्रवेश परीक्षाओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उसकी संस्थागत क्षमता मजबूत होने के बाद ही अतिरिक्त जिम्मेदारियों पर विचार किया जाना चाहिए। रिपोर्ट में NTA के भीतर शैक्षणिक शोध विंग विकसित करने, राज्य सरकारों को शासी निकाय में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने और परीक्षा नीति पर शोध करने की क्षमता बढ़ाने का सुझाव भी दिया गया है।
समिति ने कंप्यूटर एडैप्टिव टेस्टिंग (CAT) जैसी उन्नत परीक्षा प्रणाली की दिशा में काम करने की सिफारिश की है। ऐसी प्रणाली में अभ्यर्थी की क्षमता के अनुरूप प्रश्नों का चयन किया जा सकता है। इसके लिए मजबूत डिजिटल ढांचे, बड़े प्रश्न बैंक और निष्पक्ष अंक-समानीकरण की आवश्यकता होगी।
क्या अभी से लागू हो जाएंगे ये बदलाव?
संसदीय स्थायी समिति की 382वीं रिपोर्ट में NEET-UG को CBT मोड में बदलने, सरकारी परीक्षा केंद्र बढ़ाने, कटऑफ की समीक्षा, देर से पहुंचने वाले छात्रों को सीमित राहत और अन्य संस्थागत सुधारों की सिफारिश की गई है। हालांकि, इन सिफारिशों को अपने-आप लागू नियम नहीं माना जा सकता। इनके क्रियान्वयन के लिए संबंधित मंत्रालयों, NTA और अन्य सक्षम प्राधिकरणों को आवश्यक निर्णय लेने होंगे। विद्यार्थियों को परीक्षा के प्रारूप, पात्रता, कटऑफ या प्रवेश नियमों में आधिकारिक बदलाव की पुष्टि संबंधित अधिसूचना से ही करनी चाहिए।
