राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु झारखंड के गुमला जिले में आयोजित अंतर्राज्यीय जनसंस्कृति समागम समारोह ‘कार्तिक जतरा’ में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में भगवान बिरसा मुंडा को नमन करते हुए कहा कि उनकी जन्म और कर्मभूमि झारखंड की यात्रा उनके लिए तीर्थयात्रा के समान है। राष्ट्रपति ने भगवान बिरसा मुंडा को सामाजिक न्याय और आदिवासी गौरव का महान प्रतीक बताते हुए कहा कि वे हम सभी के लिए प्रेरणा और श्रद्धा के स्रोत हैं।
राष्ट्रपति ने पंखराज साहब कार्तिक ओरांव के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों के अनुरूप जनजातीय चेतना और पहचान को समृद्ध किया। कार्तिक ओरांव जी ने अपना पूरा जीवन आदिवासी समुदाय और राष्ट्र के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने शिक्षा के प्रसार और सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास किए, जो आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि यह क्षेत्र अनेक महान आदिवासी नायकों की भूमि रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार आदिवासी संग्रहालयों की स्थापना के माध्यम से देशवासियों को आदिवासी नायकों की वीरतापूर्ण और प्रेरक गाथाओं से परिचित कराने का प्रयास कर रही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी विरासत के संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति और संस्था की भी है।
राष्ट्रपति ने युवाओं से आह्वान किया कि वे आदिवासी समुदायों की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ें। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी पहचान और परंपराओं को संरक्षित रखते हुए आधुनिक विकास के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ना चाहिए। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि आदिवासी समुदाय के सभी सदस्य अपनी समृद्ध विरासत को संभालते हुए निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहेंगे।
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