तीसरे संसद खेल महोत्सव में उपराष्ट्रपति का संदेश — युवाओं से “नशीली दवाओं को ना, खेलों को हां” का आह्वान

उपराष्ट्रपति ने आगरा में आयोजित तीसरे संसद खेल महोत्सव में युवाओं को संबोधित करते हुए नशीली दवाओं से दूर रहने और खेलों को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि खेल न केवल शरीर को स्वस्थ रखते हैं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच भी विकसित करते हैं।
उपराष्ट्रपति ने युवाओं से आह्वान किया कि वे नशे जैसी बुराइयों को “ना” कहें और खेलों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ युवा ही सशक्त भारत की नींव हैं और खेलों से जुड़कर युवा अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के प्राचीन ज्ञान ने हमेशा मन और शरीर के तालमेल को महत्व दिया है। उन्होंने खेलों को केवल प्रतिस्पर्धी गतिविधियों की बजाय, चरित्र निर्माण का शक्तिशाली साधन बताया, जो अनुशासन, दृढ़ता, समूह भावना और नियमों का सम्मान जैसे मूल्य विकसित करते हैं। ये गुण व्यक्तिगत विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक हैं। श्री राधाकृष्‍णन ने कहा कि संसद खेल महोत्सव जैसे आयोजन की जमीनी स्तर पर इन मूल्यों को पोषित करने में अहम भूमिका है।

महानगरों से बाहर खेलों को बढ़ावा देने के लिए आयोजकों की सराहना करते हुए श्री राधाकृष्णन ने पिछले 11 वर्षों में भारत के खेल तंत्र में आए संरचनात्मक बदलाव का उल्‍लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, खेलो इंडिया, फिट इंडिया मूवमेंट और स्वदेशी खेलों को समर्थन दिए जाने जैसी पहल राष्ट्र के विकास का समग्र दृष्टिकोण दर्शाती है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने खेलों में उल्‍लेखनीय उपलब्धियां हासिल की है। उन्होंने अस्मिता महिला लीग जैसी पहल का उदाहरण देते हुए खेलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाए जाने के केन्द्रित प्रयासों की चर्चा की।

युवाओं में नशीली दवाओं के दुरुपयोग की चुनौती पर उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि खेल, नशामुक्त भारत के निर्माण के सबसे प्रभावी उपायों में से एक हैं। उन्होंने युवाओं से नशीली दवाओं को ना कहने और खेलों को हां कहने का आह्वान किया। उन्‍होंने जोर देते हुए कहा कि स्वस्थ और सक्रिय युवा ही एक मजबूत राष्ट्र का आधार है।

उपराष्ट्रपति ने बच्चों और युवाओं को खेलों में भाग लेने को प्रोत्साहित करने के लिए अभिभावकों और शिक्षकों का आह्वान करते हुए चरित्र निर्माण और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने संतुलित शिक्षा प्रणाली का पक्ष रखा, जो शिक्षा और खेल दोनों को समान महत्व देती है।

संसद खेल महोत्सव आगरा में 21 से 25 दिसंबर तक आयोजित किया जा रहा है। पांच दिनों के इस महोत्सव के दौरान 33 से अधिक टीम और व्यक्तिगत खेल प्रतिस्‍पर्धाओं में हजारों निवासी भाग ले रहे हैं।

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