प्रधानमंत्री मोदी ने सामाजिक कल्याण के लिए सुभाषितम के माध्यम से परोपकारी विचारों की शक्ति पर दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सामाजिक कल्याण और राष्ट्र निर्माण में परोपकारी विचारों की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि सुभाषितम जैसे प्रयास समाज को सकारात्मक दिशा देने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि सुभाषितम के जरिए प्रस्तुत विचार न केवल नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि जन-जन में सेवा, करुणा और सहयोग की भावना को भी जागृत करते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित सुभाषित आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने पहले थे। ये विचार व्यक्ति को आत्मचिंतन, सदाचार और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे ऐसे विचारों को अपने जीवन में अपनाकर सामाजिक समरसता और जनकल्याण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएं।

प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि सुभाषितम जैसे मंचों से प्रेरित होकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के संकल्प को और मजबूती मिलेगी।

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