नई दिल्ली। भारत-यूरोपीय संघ संयुक्त प्रेस वक्तव्य के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि यह शिखर बैठक भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों में एक निर्णायक और ऐतिहासिक मोड़ है। प्रधानमंत्री ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लायन का भारत आगमन पर हार्दिक स्वागत किया और इसे भारत के लिए सम्मान की बात बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यूरोपीय संघ के नेताओं का पहली बार भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना दोनों लोकतांत्रिक शक्तियों के गहरे विश्वास और मित्रता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक सहयोग और लोगों के आपसी संबंधों के कारण भारत-यूरोपीय संघ की साझेदारी लगातार मजबूत हुई है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्तमान में भारत और यूरोपीय संघ के बीच लगभग 180 अरब यूरो का व्यापार हो रहा है और आठ लाख से अधिक भारतीय नागरिक यूरोपीय देशों में रहकर वहां की अर्थव्यवस्था और समाज में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।
रणनीतिक तकनीकों, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल गवर्नेंस और विकास साझेदारियों के क्षेत्रों में सहयोग नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को साझा समृद्धि का नया ब्लूप्रिंट बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता किसानों, छोटे उद्योगों, मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र के लिए यूरोपीय बाजार के द्वार खोलेगा, निवेश बढ़ाएगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेगा।
वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यूक्रेन, पश्चिमी एशिया और इंडो-पैसिफिक जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों की सोच मिलती-जुलती है। उन्होंने बहुपक्षीय व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय नियमों के सम्मान और वैश्विक संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि यह भारत-यूरोपीय संघ शिखर बैठक भविष्य की साझेदारी को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक क्षण सिद्ध होगी।
Tags
देश विदेश