🇮🇳🌾 भारत की अगली कृषि क्रांति AI-संचालित होगी: डॉ. जीतेंद्र सिंह

मुंबई में आयोजित AI4Agri 2026 शिखर सम्मेलन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जीतेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की अगली कृषि क्रांति कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से संचालित होगी। उन्होंने AI को खेती नीति, अनुसंधान और निवेश ढांचे का केंद्रीय स्तंभ बताते हुए दावा किया कि कृषि-AI किसानों के लिए सालाना लगभग ₹70,000 करोड़ का अतिरिक्त मूल्य उत्पन्न कर सकता है।

📊 70,000 करोड़ रुपये का संभावित वार्षिक लाभ

मंत्री के अनुसार, देश की लगभग 14 करोड़ खेती इकाइयों में यदि AI-आधारित सलाह से प्रति किसान औसतन 5,000 रुपये की बचत या अतिरिक्त आय हो जाए—जैसे बेहतर बुवाई-समय, कीट-पूर्वानुमान और बाज़ार-जुड़ाव—तो कुल मिलाकर 70,000 करोड़ रुपये का मूल्य सृजित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि यह छोटे और सीमांत किसानों के लिए आय वृद्धि का ऐतिहासिक अवसर हो सकता है।

🚜 इंडिया AI मिशन और भारतजन (BharatGen)

डॉ. सिंह ने 10,372 करोड़ रुपये के इंडिया एआई मिशन का उल्लेख करते हुए बताया कि यह स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग, डेटासेट और स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त कर रहा है।

उन्होंने भारतजन (BharatGen) प्लेटफॉर्म की चर्चा की, जिसने “Agri Param” नामक कृषि-विशिष्ट AI मॉडल विकसित किया है। यह मॉडल 22 भारतीय भाषाओं में काम करता है और किसानों को उनकी मातृभाषा में सलाह देता है।

🌦️ जलवायु बुद्धिमत्ता और ड्रोन तकनीक

मंत्री ने बताया कि AI को पृथ्वी विज्ञान और जलवायु डेटा के साथ जोड़कर प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे किसान “घबराने के बजाय योजना बना सकें।”

ड्रोन और सैटेलाइट मैपिंग पहले से ही मृदा स्वास्थ्य कार्ड और भूमि सत्यापन मिशनों को मजबूत कर रहे हैं।

🧬 जैव प्रौद्योगिकी और रोग-पूर्वानुमान

AI और बायोटेक्नोलॉजी के संयोजन से रोग-प्रतिरोधी फसलें विकसित की जा रही हैं। कीट और पौधों के रोगों की शुरुआती पहचान से नुकसान कम होगा और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलेगा।

राष्ट्रीय Agri-AI नेटवर्क और डेटा कॉमन्स

डॉ. सिंह ने राष्ट्रीय Agri Data Commons और राष्ट्रीय Agri-AI अनुसंधान नेटवर्क बनाने की घोषणा की।

यह नेटवर्क विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), राज्य सरकारों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), ICRISAT और अन्य वैश्विक संस्थानों के सहयोग से विकसित होगा।

💰 निवेशकों से अपील

उन्होंने कृषि-AI को “दुनिया का सबसे बड़ा अनुपयोगित उत्पादकता बाजार” बताते हुए निवेशकों से बड़े पैमाने पर लागू होने वाले प्लेटफॉर्म में patient capital लगाने का आग्रह किया।

मुख्य बिंदु (Highlights)

AI आधारित खेती से 70,000 करोड़ रुपये वार्षिक मूल्य सृजन की संभावना

14 करोड़ खेती इकाइयों को मिलेगा लाभ

22 भाषाओं में AI कृषि सलाह

राष्ट्रीय Agri-AI अनुसंधान नेटवर्क और डेटा कॉमन्स की योजना

जलवायु बुद्धिमत्ता और ड्रोन तकनीक पर जोर

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