बालागोकुलम रजत जयंती समारोह: उपराष्ट्रपति का संबोधन

नई दिल्ली के आईएनए स्थित त्यागराज स्टेडियम में आयोजित बालागोकुलम दिल्ली-एनसीआर के रजत जयंती समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने कहा कि बालागोकुलम केवल एक संगठन नहीं, बल्कि संस्कृति और चरित्र निर्माण का सशक्त संगम है, जिसने वर्षों से युवा प्रतिभाओं की पीढ़ियों को दिशा दी है।
उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में बच्चों को कई तरह के भटकाव और मूल्यों से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में बालागोकुलम जैसे संस्थान उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और आत्मविश्वास के साथ भविष्य का सामना करने के लिए तैयार करते हैं।

उपराष्ट्रपति ने “विकास भी, विरासत भी” के मंत्र को युवाओं के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत बताते हुए कहा कि आधुनिक प्रगति के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने “अमृत काल” की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समय जिम्मेदार, अनुशासित और मूल्यों से प्रेरित नागरिकों के निर्माण का आह्वान करता है, जो देश को समृद्ध भविष्य की ओर ले जाएंगे।

बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने उन्हें संगठन की विरासत का सच्चा वाहक बताया और बड़ों का सम्मान, संस्कृति के प्रति प्रेम, सामूहिक कार्य तथा आत्म-अनुशासन जैसे गुण अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने ‘कृष्णार्पणम’ की भावना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अपने विचारों और कर्मों को उच्च उद्देश्य के लिए समर्पित करना ही भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं का सार है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्रीपाद नाइक, राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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