एसआरएन अस्पताल में हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, मरीज बेहाल

प्रयागराज के स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल में डॉक्टरों और महिला अधिवक्ता के बीच हुए विवाद के बाद हड़ताल ने उग्र रूप ले लिया। इस आंदोलन का असर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर साफ दिखाई दिया, जहां ओपीडी से लेकर इमरजेंसी सेवाएं तक प्रभावित रहीं। इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे सैकड़ों मरीजों को घंटों इंतजार के बाद बिना उपचार लौटना पड़ा।
अस्पताल परिसर में मरीजों और तीमारदारों की भारी भीड़ देखने को मिली। कई गंभीर मरीज स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर इलाज के इंतजार में परेशान नजर आए। डॉक्टरों के प्रदर्शन के कारण पंजीकरण काउंटर, जांच केंद्र और दवा वितरण व्यवस्था भी प्रभावित हुई। वहीं दूसरी ओर अधिवक्ताओं ने भी घटना को लेकर विरोध जताते हुए कार्रवाई की मांग की।

जानकारी के अनुसार, महिला अधिवक्ता और जूनियर डॉक्टर के बीच हुए विवाद के बाद मामला बढ़ गया। डॉक्टरों ने सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। वहीं अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि उनके साथ अभद्रता की गई।

हड़ताल के चलते सबसे ज्यादा परेशानी दूर-दराज से आए मरीजों को उठानी पड़ी। कई मरीज बिना जांच और दवा के वापस लौट गए। सड़क दुर्घटना और गंभीर बीमारी से जुड़े मरीजों को भी समय पर इलाज नहीं मिल पाया। अस्पताल प्रशासन और जिला प्रशासन लगातार स्थिति को संभालने में जुटे रहे।

इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन और अन्य संगठनों ने भी मामले में हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की कोशिश की। प्रशासन की ओर से निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया गया है। देर शाम तक वार्ता का दौर जारी रहा, लेकिन मरीजों की परेशानी कम नहीं हुई।

लोगों का कहना है कि अस्पतालों में इस तरह की हड़ताल से सबसे अधिक नुकसान आम जनता को होता है। अब सभी की नजर प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन पर टिकी है कि स्थिति कब सामान्य होगी।

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