गंगटोक में आयोजित एक भव्य समारोह में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने सिक्किम पुलिस को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति का निशान’ प्रदान किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने सिक्किम पुलिस के अधिकारियों और जवानों को बधाई देते हुए कहा कि वर्ष 1897 में स्थापना के बाद से यह पुलिस बल राज्य में शांति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि देश की पुलिस व्यवस्था लंबे समय तक औपनिवेशिक सोच से प्रभावित रही, जहां पुलिस का मुख्य उद्देश्य जनता की सेवा के बजाय उन पर नियंत्रण रखना माना जाता था। लेकिन अब समय बदल चुका है और पुलिस को जनता का सहयोगी, मित्र और मार्गदर्शक बनना होगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए पुलिस व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव बेहद जरूरी है।
राष्ट्रपति ने पुलिस तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आम नागरिक बिना किसी डर के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें, इसके लिए पुलिस व्यवस्था को और अधिक नागरिक हितैषी बनाना होगा। उन्होंने महिलाओं, बच्चों और समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल अपराधियों को पकड़ना नहीं बल्कि सुरक्षित, जागरूक और विश्वासपूर्ण समाज का निर्माण करना भी है। जब पुलिस लोगों की समस्याओं को समझकर उनकी मदद करेगी, तब समाज में कानून के प्रति सम्मान और विश्वास दोनों मजबूत होंगे।
राष्ट्रपति ने सिक्किम पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में शांति और भाईचारे को बनाए रखने में इस पुलिस बल का योगदान सराहनीय रहा है। उन्होंने कहा कि अपने पेशेवर और मित्रतापूर्ण व्यवहार के कारण सिक्किम पुलिस ने लोगों का विश्वास और सम्मान हासिल किया है।
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