विशाखापत्तनम। मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय तथा आंध्र प्रदेश सरकार के सहयोग से 5-6 जून 2026 को विशाखापत्तनम में समुद्री खाद्य निर्यात पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का उद्देश्य भारत की समुद्री खाद्य निर्यात क्षमता को बढ़ाना और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मजबूत करना रहा।
कार्यशाला में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रीगण, विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि, निर्यातक, उद्योग विशेषज्ञ, स्टार्टअप, एमएसएमई और शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा के दौरान समुद्री खाद्य निर्यात को मात्रा आधारित मॉडल से मूल्यवर्धित और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की ओर ले जाने पर जोर दिया गया।
तकनीकी सत्रों में ट्रेसिबिलिटी, सतत प्रमाणीकरण, मूल्यवर्धन, निर्यात विविधीकरण और गहरे समुद्र के उच्च मूल्य संसाधनों के दोहन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स, प्रसंस्करण अवसंरचना और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
कार्यशाला में यह भी रेखांकित किया गया कि स्टार्टअप और एमएसएमई समुद्री खाद्य क्षेत्र में नवाचार और निर्यात वृद्धि के प्रमुख आधार बन सकते हैं। समुद्री शैवाल, मोती संवर्धन, टूना मत्स्य पालन और अन्य उच्च मूल्य क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
सरकार ने समुद्री खाद्य निर्यात को 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सतत उत्पादन, गुणवत्ता मानकों, मूल्यवर्धन और बाजार विविधीकरण के माध्यम से भारत वैश्विक समुद्री खाद्य बाजार में अपनी हिस्सेदारी को और मजबूत कर सकता है। कार्यशाला का समापन समुद्री खाद्य निर्यात क्षेत्र के सतत विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ।
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