नई दिल्ली। संसद के 2026 के बजट सत्र के प्रारंभ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों सदनों को संबोधित करते हुए देश के उज्ज्वल भविष्य, तेज़ सुधारों और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण 140 करोड़ भारतीयों के आत्मविश्वास, आकांक्षाओं और संकल्प का सशक्त प्रतिबिंब है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आज केवल संभावनाओं का देश नहीं रहा, बल्कि समाधान प्रस्तुत करने वाला राष्ट्र बन चुका है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह समय सुधारों में तेजी, सशक्त निर्णय और प्रभावी क्रियान्वयन का है, ताकि आम नागरिक के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाया जा सके।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे देश के युवाओं, किसानों और निर्माताओं के लिए नए अवसर खुलेंगे। यह समझौता भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में और मजबूत करेगा तथा रोजगार सृजन को गति देगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार “सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन” के मंत्र में विश्वास करती है और इसी सोच के साथ देश को तेज़ी से सुधारों के मार्ग पर आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में किए गए संरचनात्मक सुधारों का सकारात्मक असर आज देश की अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रतिष्ठा में साफ दिखाई दे रहा है।
लोकतंत्र पर बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का लोकतंत्र और उसकी युवा जनसंख्या (जनसांख्यिकी) आज पूरी दुनिया के लिए आशा की किरण है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत वैश्विक चुनौतियों के बीच स्थिरता, शांति और विकास का मॉडल प्रस्तुत करेगा।
अंत में प्रधानमंत्री ने संसद से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास, सकारात्मक सोच और राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए।
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