नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सुभाषितम’ कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय जीवन मूल्यों की गहराई से व्याख्या करते हुए सद्गुण, चरित्र, ज्ञान और धन के शाश्वत महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र की मजबूती केवल भौतिक समृद्धि से नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों और संस्कारों से तय होती है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सद्गुण और चरित्र व्यक्ति के जीवन की वास्तविक पूंजी होते हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी सही दिशा दिखाते हैं। ज्ञान को उन्होंने मानव प्रगति का आधार बताते हुए कहा कि सच्चा ज्ञान केवल सूचना तक सीमित नहीं होता, बल्कि विवेक और विवेचना से जुड़ा होता है।
उन्होंने धन के संदर्भ में कहा कि धन का सही उपयोग समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए होना चाहिए। जब धन को सेवा, विकास और लोकहित से जोड़ा जाता है, तभी उसका वास्तविक मूल्य सामने आता है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से प्रेरणा लेने और अपने आचरण में नैतिकता को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री के इस संदेश को जीवन मूल्यों की पुनः स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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