पराक्रम दिवस पर प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषित साझा कर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को किया नमन

नई दिल्ली। पराक्रम दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक प्रेरणादायी संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस की वीरता, शौर्य और राष्ट्रभक्ति को स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि नेताजी का जीवन हमें सच्ची वीरता और साहस का अर्थ सिखाता है। पराक्रम दिवस देशवासियों को नेताजी के अदम्य साहस, त्याग और मातृभूमि के प्रति उनके अटूट समर्पण की याद दिलाता है।

प्रधानमंत्री ने वीरता के सर्वोच्च आदर्श को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषित साझा किया—
“एतदेव परं शौर्यं यत् परप्राणरक्षणम्।
नहि प्राणहरः शूरः शूरः प्राणप्रदोऽर्थिनाम्॥”

इस सुभाषित का भावार्थ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सबसे बड़ी वीरता दूसरों के प्राणों की रक्षा करना है। जो जीवन छीनता है वह वीर नहीं, बल्कि जो संकट में पड़े लोगों को जीवनदान देता है, वही सच्चा शूरवीर कहलाता है। यह संदेश नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आदर्शों और उनके राष्ट्र के प्रति समर्पण को सशक्त रूप से प्रतिबिंबित करता है।

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