प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गणतंत्र दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिवस भारत की स्वतंत्रता, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस राष्ट्र को नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करता है, जिससे देशवासी एकजुट होकर दृढ़ संकल्प के साथ राष्ट्र-निर्माण की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक प्रेरणादायी संस्कृत सुभाषितम् साझा किया—
“पारतन्त्र्याभिभूतस्य देशस्याभ्युदयः कुतः।
अतः स्वातन्त्र्यमाप्तव्यमैक्यं स्वातन्त्र्यसाधनम्॥”
प्रधानमंत्री ने सुभाषितम् के भावार्थ को साझा करते हुए कहा कि जो राष्ट्र पराधीन होता है, वह कभी प्रगति नहीं कर सकता। राष्ट्र की उन्नति के लिए स्वतंत्रता अनिवार्य है और स्वतंत्रता की रक्षा एवं सुदृढ़ता के लिए राष्ट्रीय एकता सबसे बड़ा साधन है।
उन्होंने देशवासियों से संविधान के मूल्यों को आत्मसात करने और एकजुट होकर विकसित भारत के संकल्प को साकार करने का आह्वान किया।
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