प्रयागराज। शहर में अवैध रूप से संचालित डग्गामार बसों का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है, जबकि रोडवेज की बसों को शहर से बाहर खदेड़ा जा रहा है। जीरो रोड बस अड्डे पर ताला लगाकर रोडवेज बसों को नैनी शिफ्ट करने का प्रयोग पहले ही दिन विफल हो गया। यात्री लेप्रोसी में रोडवेज बसों का इंतजार करते रहे, लेकिन बसों को जीरो रोड पर ही भेज दिया गया।
उधर, जीरो रोड से रामबाग और चंद्रलोक तक डग्गामार बसों ने खुलेआम अवैध बस अड्डे बना लिए हैं। सिविल लाइंस के बाद अब जीरो रोड क्षेत्र में भी ये बसें धड़ल्ले से चल रही हैं, जिससे सरकारी बसों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को जीरो रोड बस अड्डे को बंद किया गया था, लेकिन इसका असर सिर्फ रोडवेज पर ही दिखा।
क्षेत्रीय प्रबंधक रविंद्र कुमार ने पहले घोषणा की थी कि माघ मेला अवधि तक विंध्याचल, मीरजापुर, सोनभद्र, औरा, शक्तिनगर, चित्रकूट, बांदा, महोबा, खजुराहो, रीवा और सीधी जैसे रूटों की रोडवेज बसें नैनी से चलाई जाएंगी, लेकिन गुरुवार को स्थिति पूरी तरह उलट नजर आई।
इस बीच यातायात विभाग ने खुसरोबाग के पास से कौशांबी, फतेहपुर और कानपुर सहित अन्य स्थानों को जाने वाली बसों के खिलाफ कार्रवाई की। तीन बसों को सीज किया गया, जबकि 17 वाहनों का चालान काटा गया। यह कार्रवाई यातायात निरीक्षक प्रथम अमित कुमार के नेतृत्व में की गई।
वहीं, अवैध बस संचालन को लेकर एआरएम ने यूपीएसआरटीसी के एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। एआरएम के अनुसार जीरो रोड बस स्टेशन के पास चंद्रलोक, रामबाग, बैरहना और नैनी के लेप्रोसी चौराहे से प्रतिदिन 50 से 60 डग्गामार वाहन अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं।
यात्रियों का कहना है कि लेप्रोसी पहुंचने पर पता चलता है कि बसें जीरो रोड से चल रही हैं, जिससे उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है। वहीं, रोडवेज कर्मचारी संघ ने सवाल उठाया है कि डग्गामार बसों को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है और प्रशासन को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
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