ईईजेड में मछली पकड़ने हेतु ऑनलाइन एक्सेस पास का शुभारंभ

Rajiv Ranjan Singh ने 20 फरवरी 2026 को गुजरात के वेरावल स्थित केसीसी ग्राउंड में विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में मछली पकड़ने के लिए ऑनलाइन और निःशुल्क एक्सेस पास प्रणाली का शुभारंभ किया। यह पहल मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक, पारदर्शी और मछुआरा-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 24 मत्स्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों सहित 2,000 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि 500 से अधिक स्थानों से ऑनलाइन सहभागिता दर्ज की गई।

केंद्रीय मंत्री ने देशभर की 24 सहकारी समितियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 37 मछुआरों को प्रतीकात्मक रूप से एक्सेस पास वितरित किए। साथ ही मछुआरों को लाइफ जैेट, हाई-बीम टॉर्च और जीपीएस उपकरण जैसे सुरक्षा किट भी प्रदान किए गए, ताकि अपतटीय मत्स्य पालन गतिविधियां अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो सकें। गुजरात में नवगठित मत्स्य सहकारी समितियों को दो-दो लाख रुपये का अनुदान भी वितरित किया गया।
यह एक्सेस पास पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से जारी किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित होगी। मंत्री ने बताया कि यह ढांचा मछुआरा संघों, राज्यों, वैज्ञानिक संस्थानों और सहकारी समितियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। बजट 2026 की घोषणा के अनुसार, ईईजेड या खुले समुद्र में भारतीय पोतों द्वारा पकड़ी गई मछली शुल्क-मुक्त होगी, जिससे मछुआरों की आय में वृद्धि की संभावना है।

भारत का ईईजेड लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा अब तक कम उपयोग में रहा है। विशेष रूप से ट्यूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों में निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। सरकार का लक्ष्य अपतटीय मत्स्य पालन का विस्तार कर समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित करना और ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में नीली अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है।

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