भारत में मातृ मृत्यु दर घटकर 88 हुई, तीन वर्षों में 5.93 करोड़ से अधिक संस्थागत प्रसव

भारत में मातृ मृत्यु दर (MMR) में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी 2021–23 के नवीनतम बुलेटिन के अनुसार देश में मातृ मृत्यु दर घटकर प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 88 रह गई है। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री Anupriya Patel ने लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी।

सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें जननी सुरक्षा योजना और जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम प्रमुख हैं, जो संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए नकद प्रोत्साहन और शून्य-लागत स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं। इन योजनाओं के तहत गर्भवती महिलाओं को मुफ्त दवाएं, जांच, भोजन, परिवहन तथा आवश्यकता पड़ने पर रक्त चढ़ाने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

इसके अलावा प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत प्रत्येक महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मुफ्त प्रसवपूर्व जांच की सुविधा दी जाती है। विस्तारित PMSMA रणनीति के माध्यम से उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान कर उन्हें विशेष निगरानी में रखा जाता है।

सरकार द्वारा लक्ष्य (LAQSHYA) और सुमन (SUMAN) जैसी योजनाओं के जरिए प्रसव कक्षों में उच्च गुणवत्ता वाली और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। इसके साथ ही प्राथमिक रेफरल यूनिट, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग और प्रसव गृहों जैसी स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में भी बेहतर मातृ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में देशभर में 5.93 करोड़ से अधिक संस्थागत प्रसव कराए गए हैं, जिससे मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण मदद मिली है।

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