उपभोक्ता मामले विभाग ने देश की कानूनी माप विज्ञान प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने कानूनी मापन (सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियम, 2013 में संशोधन करते हुए सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्रों (GATC) का दायरा बढ़ा दिया है। अब इन केंद्रों के माध्यम से पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ CNG, LPG, LNG और हाइड्रोजन डिस्पेंसरों का भी सत्यापन और पुनः सत्यापन किया जा सकेगा।
सरकार के इस फैसले का उद्देश्य ईंधन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना, उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत करना और स्वच्छ ईंधन अवसंरचना को बढ़ावा देना है। संशोधित नियमों के तहत अब कुल 23 प्रकार के वजन और माप उपकरणों का सत्यापन GATC द्वारा किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश में CNG, LNG और हाइड्रोजन जैसे स्वच्छ ईंधनों का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में इन डिस्पेंसरों के सटीक माप और पारदर्शी लेन-देन को सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया था। सरकार का यह कदम उपभोक्ताओं को सही मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
नए नियमों के अनुसार पेट्रोल और डीजल डिस्पेंसरों के सत्यापन के लिए 5,000 रुपये प्रति नोजल शुल्क तय किया गया है, जबकि CNG, LPG, LNG और हाइड्रोजन डिस्पेंसरों के लिए यह शुल्क 10,000 रुपये प्रति नोजल निर्धारित किया गया है।
इसके अलावा राज्य सरकारों को भी अतिरिक्त श्रेणियों को अधिसूचित करने का अधिकार दिया गया है, जिससे स्थानीय जरूरतों के अनुसार सत्यापन सेवाओं का विस्तार किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि यह सुधार तकनीक आधारित शासन, पारदर्शिता और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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