प्रधानमंत्री ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के 11 वर्ष पूरे होने पर बेटियों की उपलब्धियों को बताया भारत की शक्ति

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान की 11वीं वर्षगांठ के अवसर पर देश की बेटियों की भूमिका और उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए इसे भारत के सामाजिक परिवर्तन की एक सशक्त मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि जिस देश में पुत्रियों को लक्ष्मी के समान पूजा जाता है, वहां आज से 11 वर्ष पहले इसी दिन इस अभियान की शुरुआत की गई थी, जिसका उद्देश्य समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना और उन्हें शिक्षा व समान अवसर प्रदान करना था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यह अत्यंत गर्व की बात है कि भारत की बेटियां शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, खेल, सेना, प्रशासन और उद्यमिता सहित हर क्षेत्र में नए रिकॉर्ड बना रही हैं। वे न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि राष्ट्र की प्रगति और वैश्विक पहचान को भी मजबूत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों की सफलता पूरे देश की सफलता है और यह सामाजिक सोच में आए सकारात्मक बदलाव को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में इस बात पर जोर दिया कि ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने बालिका शिक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस अभियान के माध्यम से समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा मिला है और बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा मिली है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने पुत्रियों के महत्व पर आधारित शाश्वत भारतीय मूल्यों को प्रतिबिंबित करने वाला एक संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया—
“दशपुत्रसमा कन्या दशपुत्रान् प्रवर्धयन्।
यत् फलम् लभते मर्त्यस्तल्लभ्यं कन्ययैकया॥”

इस सुभाषित का भावार्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि एक पुत्री दस पुत्रों के समान होती है और दस पुत्रों से जो पुण्य या सद्गुण प्राप्त होते हैं, वही एक पुत्री से भी प्राप्त किए जा सकते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारतीय संस्कृति की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें बेटियों को सम्मान, स्नेह और समान अधिकार दिए गए हैं।
अंत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे बेटियों के सपनों को पूरा करने में सहयोग करें, उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें और एक ऐसे समाज के निर्माण में योगदान दें, जहां हर बेटी सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त होकर देश के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सके।


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