नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026-27 में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति का संकेत देते हुए सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 7.4 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया है। वहीं प्रथम अग्रिम अनुमान में जीडीपी में 10 प्रतिशत नाममात्र वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
सरकार के अनुसार सेवा क्षेत्र विकास का प्रमुख चालक बना रहा, जिसमें 9.1 प्रतिशत का विस्तार दर्ज किया गया। राज्यों को सशक्त बनाने के लिए वित्त आयोग के माध्यम से 16.56 लाख करोड़ रुपये का कर विकेंद्रीकरण किया जाएगा, जिसमें 15.26 लाख करोड़ रुपये कर हिस्सेदारी और 1.4 लाख करोड़ रुपये अनुदान शामिल हैं।
वित्त वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार का प्रभावी पूंजीगत व्यय 17.15 लाख करोड़ रुपये (GDP का 4.4%) रहने का अनुमान है। इसमें 12.22 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च और राज्यों को 4.93 लाख करोड़ रुपये का अनुदान शामिल है।
निजी उपभोग में भी तेजी देखी गई है। पीएफसीई में 7 प्रतिशत वृद्धि पिछले 12 वर्षों में सबसे अधिक है, जबकि ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन में 7.8 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है।
सरकार ने वित्तीय अनुशासन पर जोर देते हुए वित्तीय घाटा 4.3 प्रतिशत, राजस्व घाटा 1.5 प्रतिशत और ऋण अनुपात 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का कुल निर्यात 825.3 अरब डॉलर तक पहुंचा, जबकि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 81 अरब डॉलर दर्ज किया गया। ये आंकड़े भारत की मजबूत आर्थिक प्रगति और निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाते हैं।
Tags
देश विदेश