नई दिल्ली। वर्तमान सरकार के नेतृत्व में देश में परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण एवं जनहितकारी उपयोग को व्यापक रूप से बढ़ावा दिया गया है। विशेषकर चिकित्सा और औद्योगिक क्षेत्रों में रेडियोआइसोटोप एवं रेडियोफार्मास्यूटिकल्स के स्वदेशी विकास से भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी संस्थान भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) और परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) द्वारा अनेक महत्वपूर्ण पहलें की गई हैं, जिनसे कैंसर एवं अन्य गंभीर रोगों के उपचार में क्रांतिकारी प्रगति हुई है।
चिकित्सा क्षेत्र में प्रमुख उपलब्धियां:
सरकार की बहुआयामी पहलों के तहत निम्नलिखित रेडियोफार्मास्यूटिकल्स एवं आइसोटोप का स्वदेशी विकास और उपयोग सुनिश्चित किया गया है—
131आई-एमआईबीजी – न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर के उपचार में उपयोग
Mo-99 और टेक्नीशियम-99m – नैदानिक परमाणु चिकित्सा जांच में व्यापक प्रयोग
आई-131 – थायरॉइड विकारों के निदान एवं उपचार हेतु
जीए-68-पीएसएमए – प्रोस्टेट कैंसर की पहचान और स्टेज निर्धारण
एनसीए 177Lu-DOTATATE एवं 177Lu-PSMA-617 – उन्नत कैंसर उपचार में प्रभावी
सीएस-137 पेंसिल – रक्त विकिरण के लिए
आईआर-192 ब्रैकीथेरेपी प्रणाली – आंतरिक विकिरण चिकित्सा
रूथेनियम-106 पट्टिकाएं – नेत्र ट्यूमर के उपचार हेतु
यट्रियम-90 ग्लास माइक्रोस्फीयर – यकृत कैंसर के उपचार में उपयोग
सोडियम फॉस्फेट-32 एवं समैरियम-153 – उपशामक (पैलिएटिव) देखभाल में उपयोग
इन पहलों से कैंसर उपचार अधिक सुलभ और किफायती हुआ है, जिससे देशभर के मरीजों को लाभ मिल रहा है।
🏭 औद्योगिक क्षेत्र में योगदान:
परमाणु ऊर्जा आधारित तकनीकों का उपयोग औद्योगिक रेडियोग्राफी, खाद्य संरक्षण, कृषि अनुसंधान और गुणवत्ता परीक्षण जैसे क्षेत्रों में भी किया जा रहा है। इससे उत्पादन की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों में सुधार हुआ है।
सरकार का लक्ष्य है कि परमाणु ऊर्जा का उपयोग केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित न रहे, बल्कि स्वास्थ्य, उद्योग और कृषि जैसे क्षेत्रों में भी इसका व्यापक विस्तार हो।
परमाणु विज्ञान की यह प्रगति भारत को स्वास्थ्य सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बना रही है।
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